देश के चर्चित शिक्षक और मोटिवेशनल स्पीकर अवध ओझा उर्फ ओझा सर 2 दिसंबर 2024 को आम आदमी पार्टी (AAP) में शामिल हो गए हैं। अवध ओझा की राजनीतिक पारी शुरू होते ही वो सोशल मीडिया खासकर एक्स (ट्विटर का बदला हुआ नाम) पर टॉप ट्रेंड कर रहे हैं।
अवध ओझा को लेकर सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। कोई उनके आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ने पर राय दे रहा है तो कोई उनके पढ़ाने के तरीके की चर्चा कर रहा है। लेकिन इन सब के बीच एक वीडियो को कई सोशल मीडिया यूजर ने शेयर किया है, इस वीडियो में एक लड़की, जो खुद को ओझा सर की छात्रा बता रही है। वीडियो में लड़की ने अवध ओझा के बारे में जो कहा है, लोग उसपर भी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
एक लड़की से पूछा जाता है कि क्या आप अवध ओझा के बारे में जानती हैं क्या? इस पर वो कहती है, ”अरे, वो तो एक नंबर का गुंडा है, मैं उसकी स्टूडेंट रही हूं, Next IAS में, वो हमारी बैच में था, वो ऑनलाइन क्लास लेते थे, जनवरी से मार्च तक, उन्होंने पढ़ाया होगा, दो महीने उसकी क्लास रही, वो हिस्ट्री पढ़ाता नहीं है, वो चार प्वाइंट्स लिखा देगा हिस्ट्री के, कच्छे में आता था तो वो, सच में वो कच्छे में आता था, जब मैंने शिकायत की है तो वो हंस कर टाल देते हैं।”
वीडियो में लड़की आगे कहती है, ”उनका कोई इमान नहीं है, वो सिर्फ प्रवचन देते हैं और सिर्फ S** की बातें करते हैं। मेरी मम्मी थी, जो उनका लाइव क्लास देख रही थी क्योंकि उन्हें पता है कि आज की जनता, आज के बच्चे बस यही सब बात सुनना चाहते हैं, उनको पढ़ाई से मतलब है नहीं, वो सबको ऐसा ही समझ लेते हैं। खासरकर जो गांव वाले बच्चे हैं, वो उनको आइडल बना लेते हैं।”
देखिए वीडियो को शेयर कर क्या-क्या बोले लोग?
एक यूजर ने कहा, ”अवध ओझा एक गुंडा है। वह अपना सिलेबस पूरा नहीं करता, इनरवियर पहनकर क्लास में आता है और हर समय सेक्स के बारे में बात करता है। अवध ओझा आज केजरीवाल पार्टी में शामिल हो गया, ऐसे तत्वों के लिए एक आदर्श स्थान।”
एक अन्य यूजर ने कहा, ”अवध ओझा एक नंबर का गुंडा है, अवध ओझा के एक छात्र का दावा है कि, वह इनरवियर पहनकर क्लास में आता था, पढ़ाने के बजाय सिर्फ जिंदगी के बारे में लेक्चर देता था, हर अपराधी और गुंडा आखिर में AAP में शामिल हो जाता है।”
एक अन्य यूजर कहा है कि, ”पहले नरेंद्र मोदी थे, फिर राहुल गांधी ने अपनी जगह बनाई, अब अरविंद केजरीवाल की बारी है। अब ये देखना है कि अवध ओझा का खेल कितना अलग होता है।”