
Guess This Bollywood Veteran Actress : मुंबई को सपनों को शहर कहा जाता है. जहां हर साल लाखों नए कलाकार उपने सपने पूरे करने आते हैं. हर कोई यहां की चकाचौंद भरी दुनिया का हिस्सा बनना चाहता है. इसलिए जो भी मेहनत और हुनर लेकर आता है उसे मौका मिल ही जाता है. पहले फिल्म इंडस्ट्री में जाति, धर्म का कोई भेदभाव नहीं था. जिसने भी अपने अभिनय या कला से लोगों का दिल जीता, उसे अपना लिया गया. भारत ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों से आए लोगों ने भी इंडस्ट्री में खूब नाम कमाया. आज हम एक ऐसी ही अदाकारा की कहानी आपको बनाने जा रहे हैं, जो अपने दौर की सुपरस्टार थीं. हम आज आपको जिस अदाकारा के बारे में बताने जा रहे हैं वो अपने अभिनय के साथ-साथ अपने डांस के लिए भी काफी मशहूर थीं. उनके पिता ऑस्ट्रेलियाई थे और मां तिब्बती थीं. वो जन्म से बौद्ध थीं, लेकिन स्कूल में उनका धर्म बदलकर ईसाई बना दिया गया. उन्होंने राज कपूर जैसे बड़े एक्टर के साथ काम किया था. उनकी फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी. संघर्षों से भरी उनकी जिंदगी ने उन्हें ग्लैमर की दुनिया तक पहुंचाया और उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई.
हम हां एक्ट्रेस लतिका के बारे में बात कर रहे हैं, जिनका असली नाम हूंगू लामू था और उनका जन्म दार्जिलिंग में हुआ था. उनके माता-पिता बौद्ध धर्म को मानते थे. उनके पिता दार्जिलिंग के महाराजा के घुड़साल में घोड़ों के ट्रेनर थे. लेकिन जब वह छोटी थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया. इसके बाद उनकी मां ने दूसरी शादी कर ली और वो अपने नए परिवार के साथ आगे बढ़ गईं. लेकिन लतिका को अनाथालय भेज दिया गया. उन्होंने कलिमपोंग के एक स्कॉटिश मिशनरी स्कूल में पढ़ाई की.
जहां किसी बौद्ध बच्चे को पढ़ने की इजाजत नहीं थी. इसलिए उनका धर्म परिवर्तन कराया गया. बाद में उनके सौतेले पिता का तबादला बंबई (मुंबई) हो गय और वो भी अपने पिता के साथ मुंबई आ गईं. जहां उनकी एक पड़ोसी कथक डांसर थीं, जो फिल्मों में भी काम करती थीं. उन्हें देखकर लतिका का भी फिल्मों की तरफ झुकाव बढ़ने लगा. एक दिन वही डांसर उन्हें मिनर्वा स्टूडियो ले गईं, जहां मशहूर निर्देशक सोहराब मोदी ने पहली बार उन्हें देखा. उन्हें उनका अंदाज पसंद आया.
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘परख’ (1944) फिल्म से की और उनका फिल्मी सफर शुरू हो गया. अगले कुछ सालों में उन्होंने कई फिल्मों में काम किया और अपनी जबरदस्त पहचान बनाई. उनके खाते में ‘डॉ. कुमार’, ‘लाट साहब’, ‘शांति’, ‘जुगनू’, ‘चलते चलते’, ‘जंजीर’, ‘गोपीनाथ’ और ‘मंजूर’ जैसी फिल्में रहीं. इन फिल्मों में उन्होंने अपनी शानदार एक्टिंग से दर्शकों का दिल जीत लिया. ‘गोपीनाथ’ में उन्हें राज कपूर के साथ और ‘जुगनू’ में दिलीप कुमार के साथ काम करने का मौका मिला.
शादी के बाद इंडस्ट्री को कह दिया अलविदा
सोहराब मोदी ने ही उन्हें लतिका नाम दिया था, जिससे वो पूरी फिल्म इंडस्ट्री में मशहूर हो गईं. 1944 से 1949 तक उन्होंने अपने अभिनय का जादू बिखेरा. जब उनका करियर पीक पर था, तब उन्होंने फिल्मों को अलविदा कहने का फैसला कर लिया. साल 1949 में उन्होंने मशहूर कॉमेडियन गोप से शादी कर ली और हमेशा के लिए फिल्मी दुनिया से दूर हो गईं. उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि किस तरह संघर्ष और मेहनत किसी को भी स्टार बना सकती है, चाहे उसकी शुरुआत कितनी भी मुश्किल क्यों न रही हो.