
इस कानूनी लड़ाई के बीच मस्जिद कमेटी ने स्वयं ही निर्माण को तोड़ना शुरू कर दिया। ऊपर की दो मंजिल को 10 दिनों के भीतर तोड़ लिया गया। आगे की मीनार को भी प्रथम तल पर लगाया गया है। मीनार की लंबाई भी कम की गई है। अब मस्जिद कमेटी बचे हुए हिस्से का शमन कराने की तैयारी में है।घोष कंपनी चौराहे पर बनी अबू हुरैरा मस्जिद ध्वस्त नहीं होगी। जीडीए के आदेश को कमिश्नर कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने मस्जिद कमेटी की अपील को स्वीकार करते हुए जीडीए को यह निर्देश दिया है कि मस्जिद कमेटी की बात को फिर से सुने और तब निर्णय ले।
मस्जिद कमेटी ने आदेश से पहले ही ऊपर की दो मंजिलें तोड़ ली हैं। संभव है कि मस्जिद कमेटी शमन मानचित्र दाखिल करे, जिस पर सहमत होते हुए जीडीए मानचित्र को स्वीकृति प्रदान कर दे।बता दें कि जीडीए ने बीते 15 फरवरी को पारित आदेश में घोष कंपनी चौराहा के पास बनी चार मंजिल अबू हुरैरा मस्जिद को तोड़ने का आदेश दिया था। 15 दिन का समय देते हुए मस्जिद कमेटी से इसे स्वयं तोड़ने को कहा गया था। इस आदेश के विरुद्ध ही मस्जिद कमेटी ने कमिश्नर कोर्ट में अपील की थी। 11 मार्च को मस्जिद कमेटी के अधिवक्ता व जीडीए की ओर से लिखित बहस दाखिल की गई।
मस्जिद कमेटी की ओर से तर्क प्रस्तुत किया गया था कि 100 वर्ग मीटर से कम भूखंड पर निर्माण के लिए मानचित्र पास कराना अनिवार्य नहीं है। मस्जिद का निर्माण लगभग 60 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में हुआ है। मस्जिद कमेटी के अधिवक्ता जयप्रकाश ने बताया कि जीडीए का आदेश आने के बाद ही अपील दाखिल कर दी गई थी। 11 मार्च को इस मामले में लिखित बहस दाखिल की गई। कोर्ट ने इस मामले में रिमांड कर दिया है। मस्जिद कमेटी का पक्ष सुनने का निर्देश जीडीए को दिया है।
कमेटी ने स्वयं तोड़ ली थी दो मंजिलें
इस कानूनी लड़ाई के बीच मस्जिद कमेटी ने स्वयं ही निर्माण को तोड़ना शुरू कर दिया। ऊपर की दो मंजिल को 10 दिनों के भीतर तोड़ लिया गया। आगे की मीनार को भी प्रथम तल पर लगाया गया है। मीनार की लंबाई भी कम की गई है। अब मस्जिद कमेटी बचे हुए हिस्से का शमन कराने की तैयारी में है।